NCERT Solutions for Class 8 Hindi provide complete chapter-wise answers for the main textbook titled मल्हार. It includes solutions for all 10 chapters from the latest 2026 textbook. These NCERT solutions for Class 8 help students understand prose and poetry in a simple and easy-to-follow manner.
Each answer is explained clearly to improve comprehension and Hindi writing skills. Whether students are preparing for school tests and exams, completing homework, or revising chapters, these NCERT Solutions Hindi by Shiksha Nation help in better understanding and improved answer writing.
Latest NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter wise
| S.No. | Latest Class 8 Hindi Chapter wise Links |
| 1 | Chapter 1 - स्वदेश (कविता) |
| 2 | Chapter 2 - दो गौरैया (कहानी) |
| 3 | Chapter 3 - एक आशीर्वाद (कविता) |
| 4 | Chapter 4 - हरिद्वार (पत्र) |
| 5 | Chapter 5 - कबीर के दोहे |
| 6 | Chapter 6 - एक टोकरी भर मिट्टी (कहानी) |
| 7 | Chapter 7 - मत बाँधो (कविता) |
| 8 | Chapter 8 - नए मेहमान (एकांकी) |
| 9 | Chapter 9 - आदमी का अनुपात (कविता) |
| 10 | Chapter 10 - तरुण के स्वप्न (उद्बोधन) |
Chapter-wise NCERT Solutions for Class 8 Hindi Overview
पाठ 1 - स्वदेश (कविता)
यह पाठ गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' द्वारा रचित एक ओजस्वी देशभक्ति कविता पर आधारित है, जो पाठक के मन में मातृभूमि के प्रति गहरा प्रेम और समर्पण जगाती है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे कवि उस हृदय को पत्थर के समान बताते हैं जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं है, और जोश-रहित जीवन को सर्वथा सारहीन घोषित करते हैं। यह पाठ बताता है कि देश की मिट्टी, जल और संस्कृति से प्रेम केवल भावना नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का पवित्र कर्तव्य है। इसमें कवि यह भी स्मरण दिलाते हैं कि मृत्यु एक दिन सभी को आनी है, इसलिए यदि जीवन देश के लिए समर्पित हो तो वह अमर हो जाता है, जैसे दीपक पर जलकर परवाना इतिहास में अमर हो जाता है। छात्र देशभक्ति, आत्मसम्मान, स्वदेशी भावना और राष्ट्रीय एकता के विषय में सीखते हैं।
पाठ 2 - दो गौरैया (कहानी)
यह पाठ प्रसिद्ध साहित्यकार भीष्म साहनी द्वारा लिखित एक मार्मिक और हास्यपूर्ण कहानी पर आधारित है। इसमें दो नन्हीं गौरैयों और एक परिवार के बीच घर के भीतर घोंसला बनाने को लेकर होने वाले रोचक संघर्ष का वर्णन है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे परिवार के सदस्य पहले इन चिड़ियों को भगाने का हर संभव प्रयास करते हैं, परंतु अंडों से निकले नन्हें बच्चों की बेबसी और मासूमियत देखकर उनका दिल धीरे-धीरे पिघल जाता है। यह पाठ बताता है कि छोटे और असहाय प्राणियों के प्रति करुणा और सह-अस्तित्व की भावना मनुष्य की सबसे बड़ी पहचान है। इसमें हास्य और संवेदनशीलता का ऐसा सुंदर मिश्रण है जो पाठकों को मनुष्य और प्रकृति के अटूट संबंध पर गहराई से सोचने के लिए प्रेरित करता है। छात्र प्राणी-दया, करुणा और पर्यावरण-चेतना के विषय में सीखते हैं।
पाठ 3 - एक आशीर्वाद (कविता)
यह पाठ हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि दुष्यंत कुमार द्वारा रचित एक विचारोत्तेजक कविता पर आधारित है, जो पीढ़ियों के बीच के संबंध और आशीर्वाद की गहरी अर्थवत्ता को उजागर करती है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे कवि एक साधारण आशीर्वाद के क्षण के माध्यम से आत्मनिर्भरता, जीवन के स्वप्नों और स्वयं के बल पर खड़े होने की प्रेरणा देते हैं। यह पाठ बताता है कि सच्चा आशीर्वाद वह है जो व्यक्ति को परावलंबी नहीं बनाता, बल्कि उसे अपने पैरों पर खड़ा होने और अपनी राह स्वयं तय करने की शक्ति देता है। इसमें दुष्यंत कुमार की सहज किंतु गहरी काव्य-शैली का सुंदर परिचय मिलता है, जिसमें व्यक्तिगत संबंधों को सामाजिक मूल्यों से जोड़ा गया है। छात्र स्नेह, सद्भावना, आत्मनिर्भरता और पीढ़ीगत संबंधों के महत्व के विषय में सीखते हैं।
पाठ 4 - हरिद्वार (पत्र)
यह पाठ हिंदी साहित्य के पितामह भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा लिखे गए एक जीवंत यात्रा-पत्र पर आधारित है, जो पत्र-विधा के माध्यम से हरिद्वार नगर की अनूठी छटा का वर्णन करता है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे भारतेंदु ने हरिद्वार की गंगा के घाटों, वहाँ की धार्मिक आस्था, मंदिरों की भव्यता और तीर्थयात्रियों की अविरल धारा का ऐसा सजीव चित्रण किया है कि पाठक स्वयं को उस पवित्र नगर में विद्यमान अनुभव करने लगता है। यह पाठ बताता है कि हरिद्वार केवल एक तीर्थ-स्थल नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विविधता का एक जीवंत दर्पण है। इसमें पत्र-विधा की साहित्यिक विशेषताओं का भी परिचय दिया गया है, जो छात्रों को औपचारिक और अनौपचारिक पत्र-लेखन में सहायक होता है। छात्र भारतीय तीर्थ-परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और पत्र-लेखन की विधा के विषय में सीखते हैं।
पाठ 5 - कबीर के दोहे (दोहे)
यह पाठ मध्यकालीन भक्ति-आंदोलन के महान संत कवि कबीरदास द्वारा रचित दोहों का संकलन है, जो सदियों बाद भी उतने ही प्रासंगिक और जीवंत हैं। छात्र इसमें जानते हैं कि कबीर ने अपने दोहों में जीवन की सच्चाइयों, आत्मचिंतन की आवश्यकता, अहंकार की व्यर्थता, ईश्वर-भक्ति की शुद्धता और धार्मिक आडंबर के खोखलेपन को अत्यंत सरल और मर्मभेदी भाषा में कहा है। यह पाठ बताता है कि कबीर जाति, धर्म और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता की एकता का संदेश देते हैं और बाहरी कर्मकांड की बजाय आंतरिक शुद्धता को सर्वोपरि मानते हैं। इसमें सधुक्कड़ी भाषा की विशेषताओं का परिचय भी मिलता है जो ब्रज, अवधी, राजस्थानी और पंजाबी का मिला-जुला रूप है। छात्र नैतिक मूल्यों, आत्म-शुद्धि, सामाजिक समभाव और भक्ति-साहित्य की परंपरा के विषय में सीखते हैं।
पाठ 6 - एक टोकरी भर मिट्टी (कहानी)
यह पाठ हिंदी के आरंभिक कहानीकारों में गिने जाने वाले माधवराव सप्रे द्वारा लिखित एक मार्मिक और प्रतीकात्मक कहानी पर आधारित है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे एक जमींदार अपनी भूमि से एक गरीब बुढ़िया की झोपड़ी हटवाना चाहता है, परंतु उसे कानूनी अड़चन है कि वह उसे जबरदस्ती नहीं निकाल सकता। यह पाठ बताता है कि जमींदार एक चालाकी करता है, वह बुढ़िया से अपनी देहरी की मिट्टी उठाकर उसकी जमीन पर रखने की शर्त रखता है, जिसे मानने पर बुढ़िया स्वयं ही अपनी जड़ों से उखड़ जाती है और झोपड़ी छोड़ने को बाध्य हो जाती है। इसमें मिट्टी का प्रतीक अत्यंत गहरा है, यह केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि व्यक्ति की जड़ें, उसकी पहचान और उसका अस्तित्व है। छात्र सामाजिक अन्याय, मानवीय संवेदना, धरती से जुड़ाव और शोषण की सूक्ष्म रणनीतियों के विषय में सीखते हैं।
पाठ 7 - मत बाँधो (कविता)
यह पाठ हिंदी साहित्य की महान लेखिका और कवयित्री महादेवी वर्मा द्वारा रचित एक गहन भावनात्मक कविता पर आधारित है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे कवयित्री प्रकृति के माध्यम से स्वतंत्रता की अदम्य आकांक्षा को व्यक्त करती हैं और बंधनों की व्यर्थता को उजागर करती हैं। यह पाठ बताता है कि जो आत्मा मुक्त उड़ान के लिए बनी है, उसे किसी भी बंधन में बाँधने का प्रयास प्रकृति के नियमों के विरुद्ध है, जैसे बादल को बाँधना, नदी के प्रवाह को रोकना या पक्षी के पंख कतर देना संभव नहीं। इसमें महादेवी की छायावादी शैली का परिचय मिलता है जहाँ भावनाएँ प्रकृति के बिंबों में घुलकर अभूतपूर्व काव्य-सौंदर्य उत्पन्न करती हैं। छात्र स्वतंत्रता, आत्म-अभिव्यक्ति, छायावादी काव्य की विशेषताओं और भाव-प्रधान हिंदी कविता के विषय में सीखते हैं।
पाठ 8 - नए मेहमान (एकांकी)
यह पाठ उदयशंकर भट्ट द्वारा लिखित एक रोचक एकांकी नाटक पर आधारित है, जो हिंदी पाठ्यपुस्तक में एकांकी विधा का परिचय देने वाले महत्वपूर्ण पाठों में से एक है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे अचानक आए मेहमानों से घर के सदस्यों की प्रतिक्रियाएँ, उनके बीच के संवाद और परिस्थितियों से निपटने के उनके अलग-अलग तरीके एक हास्यपूर्ण किंतु विचारोत्तेजक स्थिति उत्पन्न करते हैं। यह पाठ बताता है कि भारतीय आतिथ्य-परंपरा की भावना और आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच कभी-कभी एक रोचक टकराव पैदा होता है, जिसे लेखक ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में प्रस्तुत किया है। इसमें एकांकी की संरचना , सीमित पात्र, एकल स्थान, द्रुत संवाद और एकल प्रभाव, का भी व्यावहारिक परिचय होता है। छात्र एकांकी-विधा, संवाद-लेखन, आतिथ्य के सामाजिक मूल्यों और नाट्य-साहित्य की विशेषताओं के विषय में सीखते हैं।
पाठ 9 - आदमी का अनुपात (कविता)
यह पाठ नरेंद्र कुमार माथुर द्वारा रचित एक प्रासंगिक और चिंतनशील कविता पर आधारित है, जो मनुष्य और उसके अनुपात की अवधारणा को केंद्र में रखकर सामाजिक समानता का प्रश्न उठाती है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे कवि यह जाँचते हैं कि समाज में प्रत्येक मनुष्य को उसकी योग्यता, श्रम और मानवीयता के आधार पर उचित सम्मान और अवसर मिल रहा है या नहीं। यह पाठ बताता है कि जब समाज में असमानता बढ़ती है और कुछ लोग आवश्यकता से अधिक और बाकी लोग आवश्यकता से कहीं कम पाते हैं, तो 'आदमी का अनुपात' बिगड़ जाता है जो किसी भी स्वस्थ समाज के लिए गंभीर संकट है। इसमें सामाजिक न्याय, मानवाधिकार और समतामूलक समाज की संकल्पना को काव्य-भाषा में अत्यंत प्रभावशाली ढंग से कहा गया है। छात्र सामाजिक समानता, मानवीय गरिमा, न्याय और प्रगतिशील साहित्य की सोच के विषय में सीखते हैं।
पाठ 10 - तरुण के स्वप्न (उद्बोधन)
यह पाठ नेताजी सुभाषचंद्र बोस द्वारा दिए गए एक ऐतिहासिक उद्बोधन पर आधारित है, जो देश के युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए जीवन समर्पित करने की प्रेरणा देता है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे सुभाषचंद्र बोस ने भारत के तरुणों को केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण का स्वप्न देखने और उसके लिए हर त्याग करने के लिए आह्वान किया। यह पाठ बताता है कि नेताजी के अनुसार युवा पीढ़ी ही किसी भी राष्ट्र की असली शक्ति है और यदि वह दृढ़ संकल्प, अनुशासन और देशप्रेम से परिपूर्ण हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। इसमें उद्बोधन-विधा की भाषाई विशेषताओं का भी परिचय मिलता है, ओजपूर्ण वाक्य-संरचना, सीधा संबोधन और भावनात्मक आह्वान जो श्रोताओं को कार्य के लिए प्रेरित करती है। छात्र राष्ट्र-प्रेम, युवा-शक्ति, नेतृत्व, आत्म-बलिदान और उद्बोधन-विधा के साहित्यिक स्वरूप के विषय में सीखते हैं।

