NCERT Solutions for Class 7 Hindi provide complete answers for all chapters from the main book titled मल्हार. It includes all 10 chapters from the latest 2026 textbook. These NCERT solutions for Class 7 help students understand poetry and prose in a better manner. Each answer is explained clearly to improve writing in Hindi. Whether you are preparing for CBSE Board school tests or exams, completing homework, or revising chapters, these NCERT Solutions Hindi by Shiksha Nation ensure better understanding and improved comprehension, vocabulary and answer-writing skills.
Latest NCERT Solutions for Class 7 Hindi (मल्हार) Chapter wise 2026 27
| S.No. | Chapter Name & Topic |
| 1 | Chapter 1 - माँ, कह एक कहानी (कविता) |
| 2 | Chapter 2 - तीन बुद्धिमान (लोककथा) |
| 3 | Chapter 3 - फूल और काँटा (कविता) |
| 4 | Chapter 4 - पानी रे पानी (निबंध) |
| 5 | Chapter 5 - ननहीं होना बीमार (कहानी) |
| 6 | Chapter 6 - गिरिधर कविराय की कुंडलिया (कविता) |
| 7 | Chapter 7 - वर्षा बहार (कविता) |
| 8 | Chapter 8 - बिरजू महाराज से साक्षात्कार |
| 9 | Chapter 9 - चिड़िया (कविता) |
| 10 | Chapter 10 - मीरा के पद |
Latest Chapter-wise NCERT Solutions for Class 7 Hindi
पाठ 1 - माँ, कह एक कहानी (कविता)
यह पाठ राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित एक हृदयस्पर्शी कविता है, जो माँ-बेटे की आत्मीय बातचीत के रूप में लिखी गई है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे बालक राहुल अपनी माँ यशोधरा से बार-बार कहानी सुनाने की जिद करता है और जब माँ पूछती है कि क्या उसने उन्हें अपनी नानी समझ लिया है, तो वह चतुराई से कहता है कि वे लेटे-लेटे ही कहानी सुना दें। यह पाठ बताता है कि कैसे माँ यशोधरा उसे एक ऐसे पक्षी की कहानी सुनाती हैं जिसे एक शिकारी ने तीर मारकर घायल कर दिया था, और उस पक्षी के लिए राजा व शिकारी के बीच विवाद होने पर बात न्यायालय तक जा पहुँची। इसमें माँ अंत में राहुल से ही पूछती हैं कि न्याय किसके पक्ष में होना चाहिए, जिससे कविता में एक उपदेशात्मक मोड़ आता है। छात्र मातृ-वात्सल्य, न्याय और दया जैसे मूल्यों के विषय में सीखते हैं, और समझते हैं कि बाल-मन को कहानी के माध्यम से नैतिकता की शिक्षा किस सहजता से दी जा सकती है।
पाठ 2 - तीन बुद्धिमान (लोककथा)
यह पाठ एक अज्ञात लेखक की प्रचलित लोककथा पर आधारित है, जो पीढ़ियों से मौखिक परंपरा में चली आ रही है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे एक निर्धन पिता अपने तीनों बेटों को रुपये-पैसे या सोने-चाँदी के बजाय 'पैनी दृष्टि' और 'तीव्र बुद्धि' रूपी धन संचित करने की सलाह देते हैं, क्योंकि ऐसा धन कभी खत्म नहीं होता। यह पाठ बताता है कि पिता की मृत्यु के बाद यात्रा पर निकले तीनों भाई अपनी सूक्ष्म अवलोकन शक्ति का प्रयोग करते हुए एक ऊँट को बिना देखे ही उसकी आँख के दोष, उसकी पीठ पर लदे सामान और उसकी चाल के बारे में सटीक जानकारी दे देते हैं। इसमें यह भी वर्णन है कि जब ऊँट का मालिक उन्हें चोर समझकर राजा के दरबार में ले जाता है, तो वे एक बंद पेटी में रखे कच्चे अनार को बिना खोले ही पहचान लेते हैं और राजा को अपनी प्रतिभा से चकित कर देते हैं। छात्र सीखते हैं कि बुद्धि, सूझ-बूझ और सूक्ष्म अवलोकन की शक्ति धन से भी बड़ा खजाना है।
पाठ 3 - फूल और काँटा (कविता)
यह पाठ आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' द्वारा रचित एक प्रतीकात्मक कविता है, जिसमें एक ही पौधे पर उगे फूल और काँटे के विपरीत स्वभाव का वर्णन है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे फूल सभी को अपनी सुगंध, रंग और कोमलता से प्रसन्न करता है जबकि काँटा तितलियों के पंख कतरता है और आने-जाने वालों को चुभन देता है। यह पाठ बताता है कि दोनों एक ही वंश और एक ही जड़ से पैदा हुए हैं, फिर भी उनके आचरण में जमीन-आसमान का अंतर है। इसमें कवि स्पष्ट संदेश देते हैं कि केवल कुल या जन्म से बड़प्पन नहीं आता, बल्कि असली बड़प्पन व्यक्ति के कर्म, चरित्र और दूसरों के प्रति उसके व्यवहार से निर्धारित होता है। छात्र सज्जनता, परोपकार और सामाजिक जिम्मेदारी के विषय में सीखते हैं।
पाठ 4 - पानी रे पानी (निबंध)
यह पाठ जल के महत्व और संरक्षण की आवश्यकता पर आधारित एक विचारपूर्ण निबंध है, जो पर्यावरण-चेतना को केंद्र में रखता है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे पृथ्वी पर उपलब्ध जल का अधिकांश भाग खारा समुद्री जल है और मनुष्य के उपयोग के लिए उपलब्ध मीठे जल का अनुपात अत्यंत सीमित है। यह पाठ बताता है कि बढ़ती जनसंख्या, उद्योगों का प्रसार और जल का अंधाधुंध दोहन इस सीमित संसाधन को तेजी से घटा रहे हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए जल-संकट गहरा हो रहा है। इसमें वर्षा जल संचयन, पानी की बचत और जल-स्रोतों को प्रदूषण से बचाने जैसे व्यावहारिक उपाय भी सुझाए गए हैं। छात्र पर्यावरण-संरक्षण, जल-प्रबंधन और अपनी दैनिक आदतों को सुधारने के विषय में सीखते हैं।
पाठ 5 - नहीं होना बीमार (कहानी)
यह पाठ स्वास्थ्य और स्वच्छता के महत्व पर आधारित एक शिक्षाप्रद कहानी है, जो बच्चों को बीमारी से बचाव के व्यावहारिक तरीके सिखाती है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे अच्छे खान-पान की आदतें, नियमित व्यायाम, समय पर सोना-जागना और साफ-सफाई के नियमों का पालन करना हमारे शरीर को निरोग रखता है। यह पाठ बताता है कि गंदे हाथों से खाना, बासी और असंतुलित भोजन, और अस्वच्छ वातावरण किस तरह रोगाणुओं को पनपने का अवसर देते हैं। इसमें यह भी समझाया गया है कि बीमारी का उपचार करने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है उसकी रोकथाम, जो स्वच्छता और अनुशासित जीवनशैली से संभव है। छात्र स्वास्थ्य-जागरूकता, निवारक स्वास्थ्य उपायों और संतुलित जीवन-शैली के विषय में सीखते हैं।
पाठ 6 - गिरिधर कविराय की कुंडलिया (कविता)
यह पाठ हिंदी के प्रसिद्ध नीतिकार कवि गिरिधर कविराय द्वारा रचित कुंडलियों का संकलन है, जो अपनी विशिष्ट छह-पंक्ति की संरचना के लिए जानी जाती हैं। छात्र इसमें जानते हैं कि कुंडलिया का यह अनोखा शिल्प-विधान होता है जिसमें प्रत्येक छंद जिस शब्द से शुरू होता है उसी शब्द पर समाप्त भी होता है, जो इसे अन्य काव्य-रूपों से अलग करता है। यह पाठ बताता है कि गिरिधर ने अपनी कुंडलियों में मानव-जीवन के व्यावहारिक सत्यों को बड़े सरल और सहज शब्दों में प्रस्तुत किया है, जैसे अहंकार से बचना, सोच-समझकर कदम उठाना और दूसरों के साथ व्यवहार में विनम्रता रखना। इसमें ब्रजभाषा की मिठास और लोकोक्तियों की सहजता के माध्यम से जीवन-दर्शन की गहरी बातें कही गई हैं। छात्र नैतिक मूल्यों, आत्म-चिंतन और हिंदी काव्य की शास्त्रीय परंपरा के विषय में सीखते हैं।
पाठ 7 - वर्षा-बहार (कविता)
यह पाठ कवि मुकुटधर पांडेय द्वारा रचित एक मनोरम कविता है, जो वर्षा ऋतु के जीवंत और उत्साहवर्धक सौंदर्य का वर्णन करती है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे कवि ने आकाश में उमड़-घुमड़ते घने बादलों, चमकती बिजली, गरजते मेघों और झमाझम बरसते पानी का ऐसा जीवंत चित्र खींचा है कि पाठक स्वयं को उस वर्षा की फुहारों में भीगता हुआ महसूस करने लगता है। यह पाठ बताता है कि किस तरह वर्षा के आते ही सूखी धरती हरी-भरी हो उठती है, पेड़-पौधे झूम उठते हैं, किसानों के चेहरों पर खुशी छा जाती है और झरनों का कल-कल नाद एक अलौकिक संगीत का अनुभव कराता है। इसमें शीतल पवन, लहलहाती फसलें, भरे हुए ताल-तलैयाँ और खिले हुए फूलों के माध्यम से ऋतु-सौंदर्य का अत्यंत मोहक चित्रण किया गया है। छात्र प्रकृति-प्रेम, ऋतु-वर्णन की काव्य-परंपरा और हिंदी काव्य के सौंदर्यबोध के विषय में सीखते हैं।
पाठ 8 - बिरजू महाराज से साक्षात्कार (साक्षात्कार)
यह पाठ कथक नृत्य के महान गुरु और पद्म विभूषण पंडित बिरजू महाराज के साथ लिए गए एक यादगार साक्षात्कार पर आधारित है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे बिरजू महाराज ने बचपन से ही अपने पारिवारिक नृत्य-परंपरा को आत्मसात किया और अनवरत साधना व परिश्रम से कथक को विश्व मंच पर एक नई पहचान दिलाई। यह पाठ बताता है कि बिरजू महाराज नृत्य को केवल शरीर की भाव-भंगिमाओं तक सीमित नहीं मानते, बल्कि उनके अनुसार नृत्य मन, शरीर और आत्मा का समग्र समन्वय है जो साधक को ईश्वर के करीब ले जाता है। इसमें साक्षात्कार के प्रश्न-उत्तर शैली के माध्यम से छात्र यह भी सीखते हैं कि इस विधा में सूचना को साक्षात्कारकर्ता और साक्षात्कारदाता के वक्तव्यों के रूप में कैसे व्यवस्थित किया जाता है। छात्र भारतीय शास्त्रीय नृत्य, कला के प्रति समर्पण और साक्षात्कार-लेखन की विधा के विषय में सीखते हैं।
पाठ 9 - चिड़िया (कविता)
यह पाठ एक छोटी-सी चिड़िया के बहाने स्वतंत्रता, आनंद और सहज जीवन के गहरे भाव को प्रस्तुत करने वाली कविता है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे कवि चिड़िया की फुदकन, उसकी चहचहाहट और खुले आकाश में उसकी उन्मुक्त उड़ान के माध्यम से यह संदेश देता है कि प्रकृति के हर प्राणी को स्वतंत्र और निर्बाध जीने का अधिकार है। यह पाठ बताता है कि मनुष्य अपने स्वार्थ और विनोद के लिए छोटे प्राणियों को पिंजरे में बंद कर देता है, परंतु उनकी वास्तविक सुंदरता और जीवंतता तो खुले आकाश में ही दिखती है। इसमें चिड़िया की निश्छलता और उसके सरल, बंधनमुक्त जीवन की तुलना मानव-जीवन की जटिलताओं और बंधनों से की गई है। छात्र प्राणी-दया, पर्यावरण-संवेदना और सरल जीवन के महत्व के विषय में सीखते हैं।
पाठ 10 - मीरा के पद (पद)
यह पाठ मध्यकालीन भक्ति-आंदोलन की अमर संत कवयित्री मीराबाई द्वारा रचित पदों का संकलन है, जो श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अनन्य भक्ति और समर्पण को अभिव्यक्त करते हैं। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे मीरा ने राजघराने की सुख-सुविधाओं और सामाजिक बाधाओं को तुच्छ मानते हुए श्रीकृष्ण को ही अपना सर्वस्व मान लिया और उनकी भक्ति में स्वयं को पूरी तरह डुबो दिया। यह पाठ बताता है कि मीरा के पद ब्रजभाषा और राजस्थानी मिश्रित भाषा में हैं, जिनमें गहरा भावनात्मक आवेग है और जो भक्ति-रस की अद्वितीय अनुभूति कराते हैं। इसमें मीरा की आध्यात्मिक साहस, सामाजिक रूढ़ियों के विरुद्ध उनके विद्रोह और ईश्वर-प्रेम की असीम शक्ति का अनुपम चित्रण है। छात्र भक्ति साहित्य की परंपरा, ब्रजभाषा के काव्य-सौंदर्य और आत्मिक समर्पण के विषय में सीखते हैं।

