NCERT Solutions for Class 6 Hindi provide complete chapter-wise answers for the primary textbook titled मल्हार . It includes all 13 chapters from the latest 2026 edition. These NCERT solutions for Class 6 help students understand prose and poetry better. Each answer is explained clearly to improve comprehension and writing skills in Hindi. Whether you are preparing for CBSE Board school tests or exams, completing homework, or revising chapters, these NCERT Solutions Hindi by Shiksha Nation ensure better understanding and answer-writing skills.
Latest NCERT Solutions for Class 6 Hindi (मल्हार) Chapter wise 2026 27
| S.No. | Chapter Name & Topic |
| 1 | Chapter 1 - मातृभूमि (कविता) |
| 2 | Chapter 2 - गोल (संस्मरण) |
| 3 | Chapter 3 - पहली बूँद (कविता) |
| 4 | Chapter 4 - हार की जीत (कहानी) |
| 5 | Chapter 5 - रहीम के दोहे (दोहे) |
| 6 | Chapter 6 - मेरी माँ (आत्मकथा) |
| 7 | Chapter 7 - जलाते चलो (कविता) |
| 8 | Chapter 8 - सत्रिया और बिहू नृत्य (निबंध) |
| 9 | Chapter 9 - मैया मैं नहिं माखन खायो (पद) |
| 10 | Chapter 10 - परीक्षा (कविता) |
| 11 | Chapter 11 - चेतक की वीरता (कविता) |
| 12 | Chapter 12 - हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान (यात्रा वृतांत) |
| 13 | Chapter 13 - पेड़ की बात (निबंध) |
NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapters Overview
पाठ 1 - मातृभूमि (कविता)
यह पाठ सोहनलाल द्विवेदी द्वारा रचित कविता पर आधारित है, जिसमें कवि भारत की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक समृद्धि का वर्णन करते हैं। छात्र इसमें ऊँचे हिमालय, गंगा-यमुना जैसी पवित्र नदियों और दक्षिण से बहने वाली मलय पवन के माध्यम से देश की भौगोलिक विशेषताओं को जानते हैं। यह पाठ बताता है कि कैसे भारत को धर्मभूमि, कर्मभूमि और जन्मभूमि कहा गया है, क्योंकि यहाँ राम, सीता, श्रीकृष्ण और गौतम बुद्ध जैसे महापुरुषों ने जन्म लिया। इसमें मातृभूमि के प्रति गर्व और श्रद्धा की भावना को भी दर्शाया गया है। छात्र देशभक्ति और प्राकृतिक सौंदर्य के विषय में सीखते हैं, और समझते हैं कि अपनी मातृभूमि का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
पाठ 2 - गोल (संस्मरण)
यह पाठ एक प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी के संस्मरण पर आधारित है, जिसमें वे अपने खेल-जीवन के अनुभवों को साझा करते हैं। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे वे धीरे-धीरे एक नौसिखिया खिलाड़ी से तरक्की करते हुए 1936 के बर्लिन ओलंपिक में अपनी टीम के कप्तान बने और हॉकी का जादूगर कहलाए। यह पाठ बताता है कि वे खेल के दौरान गोल करने का श्रेय खुद लेने के बजाय गेंद दूसरे खिलाड़ी को देकर उन्हें मौका देना पसंद करते थे। इसमें उनकी खेल-भावना और टीम भावना को विशेष रूप से दर्शाया गया है, जिसके कारण वे खेल-प्रेमियों के दिल जीत लेते हैं। छात्र अनुशासन, लक्ष्य-निर्धारण और निरंतर प्रयास के महत्व के विषय में सीखते हैं।
पाठ 3 - पहली बूँद (कविता)
यह पाठ वर्षा ऋतु की पहली बूँद के महत्व पर आधारित एक कविता है, जिसमें कवि प्रकृति के अनुपम सौंदर्य का वर्णन करते हैं। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे आसमान में उड़ता बादल बिजलियों के स्वर्णिम पंखों के साथ धरती पर पहली बूँद बरसाता है, जो उसकी सूखी प्यास बुझाती है। यह पाठ बताता है कि कैसे यह पहली बूँद धरती के अंदर छिपे बीज से अंकुर निकाल लाती है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है मानो नए जीवन ने अंगड़ाई ली हो। इसमें वर्षा के आने से पहले बूढ़ी-सी प्रतीत होने वाली धरती के हरी-भरी और जवान हो जाने का सुंदर चित्रण भी है। छात्र प्रकृति-प्रेम और जल के जीवनदायी महत्व के विषय में सीखते हैं।
पाठ 4 - हार की जीत (कहानी)
यह पाठ सुदर्शन द्वारा लिखित कहानी पर आधारित है, जो बाबा भारती और उनके प्रिय घोड़े सुलतान के इर्द-गिर्द घूमती है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे डाकू खड्गसिंह, जो सुलतान की शोहरत सुन चुका है, चालाकी से लाचार बनकर बाबा भारती की सहायता पाकर घोड़े को धोखे से छीन लेता है। यह पाठ बताता है कि कैसे बाबा भारती की करुणा और उनकी विनम्रता ने ऐसे कठोर डाकू के दिल को भी पिघला दिया, जो अंत में स्वयं ही घोड़े को उनके अस्तबल में लौटा आता है। इसमें यह संदेश दिया गया है कि सच्ची जीत किसी को हराने या लूटने में नहीं, बल्कि अपने हृदय को बदलने में है। छात्र विश्वास, करुणा और मानवता की शक्ति के विषय में सीखते हैं।
पाठ 5 - रहीम के दोहे (दोहे)
यह पाठ मध्यकालीन हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि रहीम (अब्दुर्रहीम खानखाना) द्वारा रचित दोहों का संकलन है। छात्र इसमें जीवन की व्यावहारिक सच्चाइयों को बहुत ही सरल और सहज भाषा में समझते हैं, जो आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने सैकड़ों वर्ष पहले थे। यह पाठ मित्रता, परोपकार, विनम्रता, समय के सदुपयोग और संकट के समय धैर्य रखने जैसे विषयों पर गहरी नीति संबंधी शिक्षा देता है। इसमें रहीम ने अपने दोहों के माध्यम से मानव जीवन के संबंधों और व्यवहार की महत्ता को बड़ी सहजता से प्रस्तुत किया है। छात्र इन दोहों के माध्यम से नैतिक मूल्यों और जीवन-कौशल के विषय में सीखते हैं।
पाठ 6 - मेरी माँ (आत्मकथा)
यह पाठ क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा का एक मार्मिक अंश है, जो उनकी माता के प्रति समर्पित है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे उनकी माँ का विवाह केवल ग्यारह वर्ष की आयु में हो गया था, फिर भी उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति और लगन से घर पर ही अक्षर-ज्ञान प्राप्त किया। यह पाठ बताता है कि कैसे माँ ने न केवल उनकी शिक्षा में, बल्कि उनके क्रांतिकारी जीवन में भी निरंतर सहायता और प्रेरणा दी। इसमें रामप्रसाद बिस्मिल स्वयं स्वीकार करते हैं कि यदि उन्हें ऐसी माता न मिलतीं, तो वे भी सामान्य मनुष्यों की भांति संसार-चक्र में फँसकर जीवन व्यतीत करते। छात्र मातृ-शक्ति, प्रेरणा और संघर्ष के विषय में सीखते हैं।
पाठ 7 - जलाते चलो (कविता)
यह पाठ द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी द्वारा रचित कविता पर आधारित है, जो प्रेम और स्नेह के दीये जलाते रहने की प्रेरणा देती है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे कवि विज्ञान की शक्ति के बावजूद यह संदेश देते हैं कि स्नेह और प्रेम के बिना अंधकार को मिटाना संभव नहीं है। यह पाठ बताता है कि युगों से दीये और तूफान की यह कहानी चली आ रही है, जहाँ अनगिनत दीये बुझाए जाते हैं, परंतु जो ज्योति स्वयं बुझ गई है, वही तिमिर को आगे उजाला देती रहेगी। इसमें कवि का विश्वास है कि जब तक धरा पर एक भी दीया जलता रहेगा, अंधकार भरी रात को सवेरा अवश्य मिलेगा। छात्र आशा, संघर्ष और निरंतर प्रयास के महत्व के विषय में सीखते हैं।
पाठ 8 - सत्रिया और बिहू नृत्य (निबंध)
यह पाठ लंदन में रहने वाली एक लड़की एंजेला के असम की यात्रा के अनुभवों पर आधारित यात्रा-वृतांत है, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता को उजागर करता है। छात्र इसमें असम की दो प्रमुख नृत्य परंपराओं - सात्रिया और बिहू - के इतिहास, विशेषताओं, पोशाक और संगीत वाद्ययंत्रों के विषय में जानते हैं। यह पाठ बताता है कि कैसे एंजेला इन रंग-बिरंगे नृत्यों से इतनी अधिक प्रभावित होती है कि लंदन लौटने के बाद भी वह हर पल इनका अभ्यास करती रहती है। इसमें उसके अपने स्कूल में सत्रिया और बिहू नृत्य की वीडियो रिकार्डिंग के साथ प्रस्तुति देने का भी वर्णन है। छात्र भारत के विभिन्न नृत्य रूपों और साझी सांस्कृतिक विरासत के विषय में सीखते हैं।
पाठ 9 - मैया मैं नहिं माखन खायो (पद)
यह पाठ सूरदास द्वारा रचित एक प्रसिद्ध पद है, जो श्रीमद्भागवत महापुराण से लिया गया है और बाल-कृष्ण की मासूम लीलाओं का वर्णन करता है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे माखन चुराने के बाद बालकृष्ण माता यशोदा से मासूमियत से इनकार करते हुए दलील देते हैं कि वे तो छोटे बालक हैं और उनके छोटे हाथों से ऊँचाई पर रखा छींका कैसे पाया जा सकता है। यह पाठ बताता है कि कैसे कृष्ण ग्वाल-बालों को ही अपना शत्रु बताते हैं, जो जबरदस्ती माखन उनके मुख पर लगा देते हैं। इसमें अंत में यशोदा माँ श्रीकृष्ण की इन मासूम बातों पर हँसते हुए उन्हें अपने हृदय से लगा लेती हैं। छात्र वात्सल्य रस और बाल-मनोविज्ञान के विषय में सीखते हैं।
पाठ 10 - परीक्षा (कहानी)
यह पाठ कथा-सम्राट प्रेमचंद द्वारा लिखित कहानी पर आधारित है, जो देवगढ़ रियासत में नए दीवान के चुनाव की एक अनोखी कहानी प्रस्तुत करती है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे बूढ़े दीवान सरदार सुजानसिंह अपने स्थान पर एक योग्य व्यक्ति को चुनने के लिए स्वयं एक लाचार किसान का रूप धारण करकर सभी उम्मीदवारों की परीक्षा लेते हैं। यह पाठ बताता है कि कैसे अधिकांश उम्मीदवार किसान की सहायता को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जबकि केवल पंडित जानकीनाथ ही निःस्वार्थ भाव से उनकी सहायता करते हैं। इसमें अंत में जानकीनाथ को ही नया दीवान घोषित किया जाता है। छात्र सीखते हैं कि किसी भी पद के लिए केवल डिग्री और बाहरी योग्यता ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि चरित्र, दया और कर्तव्यनिष्ठा का अधिक महत्व होता है।
पाठ 11 - चेतक की वीरता (कविता)
यह पाठ श्यामनारायण पांडेय द्वारा रचित कविता 'हल्दीघाटी' का एक अंश है, जिसमें महाराणा प्रताप के वीर घोड़े चेतक की अद्वितीय वीरता का वर्णन किया गया है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे चेतक युद्धभूमि में हवा से भी तेज दौड़ते हुए शत्रु सेना के बीच निडर होकर घुस जाता था, और महाराणा प्रताप की आँखों के इशारे को समझकर तुरंत मुड़ जाता था। यह पाठ बताता है कि कैसे चेतक भयानक भालों, ढालों और तलवारों के बीच से भी बिना डरे सरपट दौड़ निकलता था, और दुश्मन उसकी इस फुर्ती को देखकर दंग रह जाते थे। इसमें चेतक की स्वामिभक्ति और युद्ध-कौशल का अद्भुत चित्रण है। छात्र वीर रस, साहस और स्वामिभक्ति के विषय में सीखते हैं।
पाठ 12 - हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान (यात्रा वृतांत)
यह पाठ रामधारी सिंह दिनकर द्वारा लिखित यात्रा-वृतांत है, जिसमें लेखक अपनी केन्या (नैरोबी) और मॉरिशस की यात्रा के अनुभवों का वर्णन करते हैं। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे नैरोबी के नेशनल पार्क में लेखक ने सिंहों, हिरणों और जिराफ को उनके प्राकृतिक आवास में देखा, जहाँ हिरण समूह में खड़े होकर अपनी सुरक्षा करते थे। यह पाठ बताता है कि कैसे मॉरिशस में भारतीय मूल के लोगों ने अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं को इतनी सजीवता से बनाए रखा है कि उस द्वीप को मानो एक छोटा-सा हिंदुस्तान ही बना डाला है। इसमें मॉरिशस की वास्तविक शक्ति वहाँ के भारतीय मूल के निवासियों को बताया गया है। छात्र भारतीय संस्कृति की जीवंतता और विदेशों में बसे भारतीयों के योगदान के विषय में सीखते हैं।
पाठ 13 - पेड़ की बात (निबंध)
यह पाठ प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीशचन्द्र बसु द्वारा बांग्ला से अनुवादित एक निबंध है, जो एक पेड़ के दृष्टिकोण से उसके अपने जीवन और मनुष्यों के साथ उसके संबंध की कहानी कहता है। छात्र इसमें जानते हैं कि कैसे एक छोटे से बीज से अंकुरित होकर पेड़ धीरे-धीरे बड़ा होता है, और इस यात्रा में सूरज की रोशनी, पानी और उपजाऊ मिट्टी पर उसकी निर्भरता को दर्शाया गया है। यह पाठ बताता है कि कैसे पेड़ बिना किसी अपेक्षा के सभी को छाया, फल और प्राणवायु प्रदान करता है, फिर भी मनुष्य अक्सर उसकी उपेक्षा करते हैं। इसमें पर्यावरण-संतुलन में पेड़ों की अनिवार्य भूमिका पर विशेष ज़ोर दिया गया है। छात्र प्रकृति-संरक्षण और पेड़ों के महत्व के विषय में सीखते हैं, और यह सीखते हैं कि उनकी रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है।

